— नरेंद्रनाथ महाराज खुद कर्म करते है और दूसरों से भि कर्म करवाते है, और उनके पाप धुलवाते है। खुद साधना करके अपने गुरूके छायामे रहते है और कर्म तथा साधना का आनंद लेते है। हम तो केवल खुदकी साधना कर पाते है ।गुरूकृपा के कारण आप हिमालय से दूर रहकर भी वो कार्य कारते है जो हम हिमालय मे रहकर भी नही कर पाते।